मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के मुद्दे पर विपक्ष कर्मचारियों की भावनाएं भड़का रहा है। विपक्ष के वाकआउट के बाद मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि पुरानी पेंशन योजना कांग्रेस सरकार ने बंद की थी। आज वही कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को गुमराह कर रही है। हिमाचल में 2003 में पुरानी पेंशन योजना को बंद किया था, उस समय वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने पूछा, यदि वीरभद्र सिंह जीवित होते तो भी क्या कांग्रेस नई पेंशन योजना (एनपीएस) का विरोध करती। कांग्रेस वीरभद्र सिंह के नाम पर वोट तो मांग रही है, लेकिन उनके निर्णयों का सम्मान नहीं कर रही।जयराम ठाकुर ने कहा कि 25 साल के राजनीतिक जीवन में विपक्ष की इतनी खराब हालत कभी नहीं देखी। कांग्रेस की पूरे देश में नैया डूब चुकी है और अब पार्टी हिमाचल में कर्मचारियों की भावना को भड़का कर अपनी नैया बचाने की कोशिश कर रही है।
हम भी प्रदेश में कांग्रेस की नैया डुबाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। यदि ओपीएस बहाली की संभावना होगी तो हम इसे बहाल करने में पीछे नहीं हटेंगे। ओपीएस को केंद्र की मदद के बिना लागू नहीं किया जा सकता।मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कांग्रेस कर्मचारी हितों के लिए इतनी ही चिंतित है तो 2012 में सत्ता में आने पर क्यों ओपीएस बहाल नहीं की। प्रदेश सरकार हर साल एनपीएस पर 911 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। 2018 में यह राशि महज 250 करोड़ थी। इसी तरह प्रदेश सरकार ने एनपीएस कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सुविधा शुरू की है और अब तक 5612 कर्मचारियों को 110 करोड़ रुपये की ग्रेच्युटी दी जा चुकी है। इसी तरह परिवार पेंशन व इनवेलिड पेंशन का लाभ भी 2200 एनपीएस कर्मचारियों व उनके परिवारों को दिया जा रहा है। इस पर हर साल 250 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैैं।