हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा मंदिरों के धन को सरकारी खजाने में जमा करने के आदेश को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध जताया है। भाजपा नेताओं ने सरकार पर सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने और धार्मिक स्थलों को आर्थिक संकट में डालने का आरोप लगाया है। सिरमौर जिला भाजपा प्रवक्ता मेलाराम शर्मा और भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रणवीर ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सुक्खू सरकार पूरी तरह से आर्थिक रूप से कंगाल हो चुकी है और अब अपने खर्चों को पूरा करने के लिए मंदिरों से धन एकत्र करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार “ऋणं कृत्वा घृतम् पिवेत” की नीति पर चल रही है और अब प्रदेश के मंदिरों से भीख मांगने तक पहुंच गई है।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपने खास समर्थकों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर जनता के पैसों का दुरुपयोग कर रही है और अब सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए मंदिरों के धन पर नजर गड़ा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में वहां चढ़ाए गए दान को सरकारी खाते में स्थानांतरित करना जनता की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने यह आदेश केवल हिन्दू धर्मस्थलों के लिए जारी किया है, जबकि प्रदेश में मौजूद मस्जिदों, गुरुद्वारों और चर्चों को इससे अलग रखा गया है। भाजपा नेताओं ने इसे धार्मिक भेदभाव करार देते हुए सरकार से तुरंत इस निर्णय को वापस लेने की मांग की।
भाजपा नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने मंदिरों से धन लेने के अपने आदेश को वापस नहीं लिया, तो प्रदेश के सनातनी लोग और श्रद्धालु बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल के शक्तिपीठ और देवी-देवता सरकार के इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे और इसका गंभीर परिणाम सुक्खू सरकार को भुगतना पड़ेगा। प्रदेश की जनता और धार्मिक संस्थानों के हितों की रक्षा के लिए भाजपा ने इस मुद्दे पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।