चौपाल में करोड़पति प्रत्याशियों में संग्राम, मंगलेट बना रहे चुनाव को दिलचस्प

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उत्तराखंड की सीमा पर चौपाल विधानसभा क्षेत्र का विकास 60 के दशक से शुरू हुआ। विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से प्राकृतिक संपदा से भरपूर है। खास बात ये है कि चौपाल निर्वाचन क्षेत्र से करोड़पति प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।भाजपा के बलबीर वर्मा प्रदेश के धनाढ्य राजनीतिज्ञ हैं। वहीं, कांग्रेस के रजनीश किमटा की गिनती हिमाचल प्रदेश के पहले पांच अमीर उम्मीदवारों में की जा रही है। किमटा अकसर निजी हेलीकॉप्टर से कार्यक्रमों में भाग लेने जाते हैं। किमटा ने सम्पति में मर्सिडीज़ कार के अलावा अन्य महंगी गाड़ियों का जिक्र तो किया, लेकिन हेलीकॉप्टर से जुड़ी जानकारी शेयर नहीं की है, लिहाजा रेंट पर लेते है।   

 निर्वाचन क्षेत्र की एक खासियत यह भी है कि यहां के मतदाता पार्टी को दरकिनार कर व्यक्तिगत छवि को तरजीह देकर मतदान करते हैं। जिसके चलते यहां अनेकों दफा निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में बाजी मारी है। चौपाल विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक आबादी राजपूत वोटरों की है। निर्वाचन क्षेत्र से अब तक जितने भी विधायक बने हैं, वो राजपूत बिरादरी से संबंध रखते हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री राधा रमण शास़्त्री एक अपवाद रहे हैं। मगर वह भी जातिवाद की राजनीति से पार नहीं पा सके। उन्हें मतदाताओं ने सिर्फ दो बार इस क्षेत्र से जीतने का मौका दिया। कुपवी बेल्ट इस क्षेत्र में सबसे दुर्गम इलाका है। यहीं के वोटर हार-जीत तय करते हैं। इस क्षेत्र का विकास अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा कम हुआ है। सड़कों की दिक्कत काफी रही है। बाकी नेरवा, झिकनीपुल, गुम्मा व चौपाल बैल्ट अब काफी विकसित हो चुके हैं। निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता भी हार-जीत का निर्णय करने में सक्षम है। हालांकि, राजनीतिक रूप से यह समुदाय ज्यादा सक्रिय नहीं है।

1972 में कांग्रेस के दिवंगत केवल राम चौहान विधायक बने थे। केवल राम चौहान स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल के खासमखास थे। 1977 में जनता पार्टी के राधा रमण शास्त्री यहां से विधायक चुने गए। 1982 में दोबारा कांग्रेस के केवल राम चौहान ने चुनाव जीता। 1983 में रामलाल ठाकुर को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद नए बने मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह ने केवल राम चौहान को डाउन साइज करना शुरू कर दिया।1985 के चुनाव में केवल राम चौहान को टिकट नहीं मिला। यहां से जुब्बल के राजा योगेंद्र चंद को टिकट दिया गया और वो चुनाव जीत भी गए। 1990 में भाजपा लहर में राधा रमण शास्त्री यहां से चुनाव जीतने में सफल रहे। इस हलके को पहली व अंतिम दफा कैबिनेट मंत्री का पद हासिल हुआ। शांता कुमार की सरकार में राधा रमण शास्त्री प्रदेश के शिक्षा मंत्री रहे।