जिला ऊना के कस्बा मुबारिकपुर स्थित एक निजी होटल में अखिल भारतीय संत परिषद की तीन दिवसीय धर्म संसद का रविवार को शुभारंभ किया गया। धर्म संसद की अध्यक्षता यति नरसिंहानंद सरस्वती ने की। उन्हीं के शिष्य यति सत्य देवानन्द सरस्वती द्वारा इस धर्म संसद का आयोजन किया गया है।
सनातन धर्म के संरक्षण और हिंदू समाज के विभिन्न धार्मिक पर्वों के सुरक्षित आयोजन के चिंतन मनन को लेकर संत समाज के साथ-साथ हिंदू संगठनों के प्रचार को और अन्य लोगों द्वारा यह धर्म संसद बुलाई गई है। संत समाज का कहना है कि वर्तमान परिदृश्य में हिंदू अपने ही देश में असुरक्षित हो चुके हैं। परिस्थिति यह है कि चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो वह राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते हिंदू हितों को कुचलने में कोई कमी नहीं रख रहा। जिससे हिंदू संस्कृति का लगातार पतन जारी है।
वहीं इस धर्म संसद में देश के सभी हिस्सों से पहुंचे संत समाज भी शिरकत कर रहे है। जिसमें मुख्य रूप से अन्नपूर्णा भारती, अमृतानंद, बालयोगी ज्ञाननाथ, रामानंद सरस्वती और यति सत्य देवानन्द सरस्वती भी मौजूद रहे। इस मौके पर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में हिंदू समाज लगातार पतन की ओर अग्रसर है। जिसका सीधा कारण भारतीय राजनीति में केवल मात्र एक समुदाय विशेष के प्रति झुकाव होना है। यती नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि एक समय था जब अमरनाथ और माता वैष्णो देवी की यात्रा पर मुस्लिम समुदाय द्वारा पथराव किए जाते थे। लेकिन अब हालत यह है कि दुर्गा अष्टमी के दिन देशभर में निकलने वाली शोभायात्रा पर भी पथराव और हमले होने लगे हैं।
भारतवर्ष के बीच हिंदू समाज के लिए इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था भी केवल मात्र मुस्लिम समुदाय के प्रति झुकाव रखती है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश जैसे शांतिप्रिय राज्य में भी घरों में घुसकर बेटियों की हत्याएं की जा रही हैं। सदैव विवादित बयानों के चलते सुर्खियों में रहने वाले यति नरसिंहानंद सरस्वती का कहना है कि केवल मात्र सच्चाई बयान करते हैं लेकिन यही सच्चाई उस वर्ग को चुभ जाती है जो हिंदू समाज को कुचलने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने दो टूक कहा कि हिंदुओं को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए, इसके साथ-साथ परिवारों को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवारों की मजबूती पैसे से नहीं होती, अपितु रिश्तो को मजबूत करने से ही परिवारों की मजबूती होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सु संस्कारी बनाने के साथ-साथ बलशाली भी बनाए ताकि वह अपने परिवारों और विशेष रूप से बहू बेटियों की सुरक्षा कर सकें, और देव भूमि की और हिंदू भूमि की सुरक्षा कर सकें।