जहाँ एक और पिता राज कुमार ने फ़ौज में रहकर देश की सेवा की वहीं उनकी बेटी आकृति ठाकुर ने 720/622 अंक आए और 97.56 % के साथ ये परीक्षा उत्तीर्ण करी ।
आकृति ठाकुर ने बताया कि उसकी माता अरुणा जो की गृहणी है का सपना था कि वह भी अपने पिता राज कुमार की तरह देश व आम जन मानस की सेवा करे । उनकी माता अरुणा शुरू से ही चाहती थी कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर हर वर्ग के लोगो की सेवा करे ।
आकृति ने बताया कि उनकी माता हमेशा उसे प्रोत्साहित करती थी कि वह शुरू से ही आपने सुख सुविधाएँ छोड़ कर बच्चों के भविष्य के लिए जुटी रहती थी ।
माता व पिता के आशीर्वाद से आज मैं उनके सपने साकार करने में कामयाब हुई हूँ और उन्हीं के आशीर्वाद से मैंने ये मुक़ाम हासिल किया है ।
आकृति ने कहा कि मेरे माता – पिता ने अपने सारे सुख छोड़कर मेरे कैरियर के बारे में ही सोचा । हमेशा हर घड़ी में मुझे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया वहीं छोटा भाई आकाश ठाकुर भी उसकी इस उपलब्धि से बहुत खुश है ।
आकृति ने कहा कि वह अपने माता-पिता के योगदान को कभी भी भूल सकती । इन दोनों ने मेरा हमेशा दोस्त की तरह साथ दिया और कभी भी मुझे किसी बात के लिए रोका व टोका नहीं । इनका योगदान मेरी ज़िंदगी में अतुल्य है । आकृति ने जेएनवी कुनिहार का भी आभार जताया जिन्होंने उसे प्राथमिक शिक्षासे उच्च शिक्षा दी और आज इस मुक़ाम पर पहुँचाया ।