संस्कृत भाषा की रक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन करना हमारा नैतिक उत्तरदायित्व – राजिन्द्र गर्ग

बिलासपुर 12 मार्च –  खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजिन्द्र गर्ग ने राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार में पुरस्कार वितरण एवं महाविद्यालय अधिग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश संस्कृत परिषद ने कोरोना काल में संस्कृत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रकार की 9 राज्य स्तरीय विद्यालय संस्कृत प्रतियोगिताएं आॅनलाईन आयोजित कर सराहनीय कार्य किया है जिसके लिए वे बधाई के पात्र है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी मूल भाषा है। विश्व में सबसे पुरानी भाषा माने जाने वाली संस्कृत अनेकों भाषाओं की जननी है। उन्होंने कहा कि भारत में मुगलों और अंग्रेजों ने गुलामी काल में हमारी संस्कृति को मिटाने के लिए अनेकों विसंगतियां लाई परंतु भारत गुलामी के बावजूद भी भारत बना रहा और इसकी विश्व गुरु की पहचान कायम रही।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा की रक्षा के साथ-साथ इसका संरक्षण एवं संवर्धन करना हमारा नैतिक उत्तरदायित्व है। भारत की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध और सुदृढ़ है जिसे सहेज कर रखना आवश्यक है और यह तभी संभव है जब हम संस्कृत भाषा को अधिमान देंगे। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता है। प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए अनेकों अहम फैसले लिए गए है। प्रदेश सरकार ने अध्ययन के साथ सबसे पहले नई शिक्षा नीति को लागू करते हुए बच्चों को तीसरी कक्षा से ही संस्कृत भाषा सिखाने के उद्देश्य से पाठयक्रम में जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त शास्त्री के पद को भी टीजीटी का पदनाम देकर बराबर का दर्जा दिया गया है और संस्कृत को द्वितीय राज भाषा का दर्जा देकर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सरकार प्रत्यनशील है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही है जिसके लिए औपचारिकताएं पूर्ण करने के लिए कदम बढ़ाए गए है।
उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय के सरकारीकरण के लिए बड़े दिनों से मांग उठ रही थी जिसको पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा जून, 2021 में इस विषय को कैबिनेट में लाकर, महाविद्यालय को सरकारी क्षेत्र में लाने की घोषणा कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में 7 पदों को भरा गया है और अन्य विषयों के पद भी सृजित किए जा रहे तथा क्रमबद्ध तरीके से भवन और खेल मैदान बनाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र हब बनता जा रहा है। कल्लरी काॅलेज में 5 विषयों की पीजी तथा वोकेशनल कक्षाएं, घण्डालवीं में सभी सुविधाओं के साथ काॅलेज। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य के क्षेत्र में घुमारवीं नागरिक चिकित्सालय को 50 से 100 बिस्तरों का किया गया है तथा डाॅक्टरों के पद 5 से बढ़ाकर 10 कर दिए गए है जिसमें से सभी अपनी सेवाएं दे रहे। भराड़ी अस्पताल को 30 से 50 बिस्तरों का किया गया है इसके साथ एमडी मेडिसन के डाॅक्टर अस्पताल में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है।
उन्होंने कहा कि घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र में सड़को का जाल बिछाया जा रहा है। हर गांव और हर पंचायत को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन चार वर्षों में विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में 170 से ज्यादा सड़कों का निर्माण किया गया है।
कार्यक्रम में मंत्री राजिन्द्र गर्ग ने प्रतियोगिताओं में विजेता रहे प्रतिभागियों को पुरस्कृत किए। 
इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक पंकज ललित ने कहा कि संस्कृत देवों की भाषा है और संस्कृत ही विश्व की सबसे पुरानी भाषा भी है। इसी भाषा से कई भाषाओं का उदय हुआ है। वेद पुराण और श्रीमद्भागवत गीता आदि ग्रंथों की रचना भी संस्कृत भाषा में ही हुई है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है संस्कृत में लिखे गए ग्रंथों को आम जनमानस तक पहुंचाया जाए ताकि इससे वे अपना ज्ञानवर्धन कर सके। इस भाषा में वर्तमान समय में करियर की भी अपार संभावनाएं है।
इस अवसर पर सचिव अकादमी डॉ. केश्वा नंद कौशल, प्रधानाचार्य डॉ. रामकृष्ण, संस्कृत विद्वान डाॅ. लेख राम शर्मा इसके साथ ही बलद्वाड़ा काॅलेज से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य लेख राम, विद्यालय के संस्थापक डाॅ. दीना नाथ शर्मा, मंडल महामंत्री राजेश ठाकुर, एस.सी मोर्चा के प्रदेश सचिव विशन दास, महिला मोर्चा मंडल महासचिव रेणु ठाकुर, उपाध्यक्ष बबीता, कोषाध्यक्ष गोमती, स्थानीय ग्राम पंचायत के प्रधान अनिता, उप प्रधान दीप सिंह पटियाल सहित अन्य पंचायती राज संस्था के पदाधिकारी एवं अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।