केंद्र के पैसे से अपनी राजनीति चमका रहे मुख्यमंत्री सुक्खू, ‘माल महाराज का, मिर्जा खेले होली’ की कहावत कर रहे चरितार्थ : त्रिलोक कपूर

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हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर, मुख्यमंत्री उत्सवों और रैलियों में व्यस्त; सरकारी कर्मचारियों को भीड़ जुटाने के लिए बुलाने के आरोपों की हो जांच : कपूर

केंद्र की योजनाओं का पैसा बांटकर वाहवाही लूटना बंद करें मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का भी करें आभार व्यक्त

कृष्णा लैब की 110 करोड़ रुपये की कथित देनदारी, बंद होती जांच सेवाएं और प्रभावित सर्जरी कांग्रेस सरकार की विफलता का प्रमाण : कपूर

शिमला, 5 नवंबर 2026। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से प्राप्त धनराशि को बांटकर अपनी उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों के योगदान का उल्लेख तक नहीं करते।

कपूर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू पर ‘माल महाराज का, मिर्जा खेले होली’ की कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं का श्रेय मुख्यमंत्री स्वयं लेने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने राजस्थान से 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने के समझौते से चार महीने में 400 करोड़ रुपये की अनुमानित आमदनी के दावे पर भी सवाल उठाए। कपूर ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है, बिजली बेचने से कितनी शुद्ध आय होगी और इस राशि का उपयोग किन कार्यों में किया जाएगा।

कपूर ने कहा कि चुराह में 60.67 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के साथ मुख्यमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि इनमें केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी कितनी है। प्रदेश की जनता को योजनाओं के वित्तपोषण की वास्तविक जानकारी मिलनी चाहिए।

स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, जनकल्याणकारी योजनाएं वेंटिलेटर पर

त्रिलोक कपूर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी गरीबों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाएं आज स्वयं वेंटिलेटर पर पहुंच गई हैं।

उन्होंने कहा कि कृष्णा डायग्नोस्टिक्स द्वारा सरकारी अस्पतालों में प्रदान की जाने वाली निःशुल्क जांच सेवाएं भुगतान विवाद के कारण प्रभावित हुई हैं। लगभग 110 करोड़ रुपये की कथित लंबित देनदारी पर सरकार को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कपूर ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में कहीं मशीनें खराब पड़ी हैं, कहीं जांच सुविधाएं प्रभावित हैं और कहीं आवश्यक सर्जरी नहीं हो पा रही हैं। हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के अंतर्गत लंबित भुगतान के कारण मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने रोबोटिक सर्जरी की लागत और संबंधित व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि मरीजों पर कितना आर्थिक बोझ पड़ रहा है और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का वास्तविक लाभ कितने लोगों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री का विजन क्या है, जनता को स्पष्ट जवाब दें

कपूर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश के विकास और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए उनका वास्तविक विजन क्या है।

उन्होंने कहा कि केवल घोषणाएं, उद्घाटन और जनसभाएं करने से प्रदेश का विकास नहीं होगा। जनता अब घोषणाओं के बजाय धरातल पर परिणाम देखना चाहती है।

क्या सरकारी कर्मचारियों पर रैलियों में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है?

त्रिलोक कपूर ने मुख्यमंत्री के हालिया दौरों और जनसभाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि भाजपा को ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि मुख्यमंत्री के विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को शामिल होने के लिए कहा जा रहा है।

कपूर ने प्रश्न उठाया कि क्या सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक जनसभाओं का हिस्सा बनाने के लिए किसी प्रकार का प्रशासनिक दबाव डाला जा रहा है? क्या सरकारी संसाधनों का उपयोग राजनीतिक भीड़ जुटाने के लिए किया जा रहा है?

उन्होंने कहा कि इन सूचनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि सरकारी कर्मचारियों पर राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का दबाव डाला जा रहा है, तो यह गंभीर विषय है और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कपूर ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि सरकारी कर्मचारी प्रदेश की जनता की सेवा के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल की रैलियों में भीड़ बढ़ाने के लिए नहीं।

अंत में त्रिलोक कपूर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू केंद्र सरकार के आर्थिक सहयोग को स्वीकार करने का राजनीतिक साहस दिखाएं, स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाएं और प्रदेश की जनता के सामने अपनी सरकार का स्पष्ट विकास रोडमैप प्रस्तुत करें।

उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश सरकार की घोषणाओं, वित्तीय पारदर्शिता, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाती रहेगी।

प्रकाशन से पूर्व कृष्णा लैब की ₹110 करोड़ की देनदारी, रोबोटिक सर्जरी की लागत और सरकारी कर्मचारियों पर दबाव संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।